हिंदु धर्म (संस्कृत: सनातन धर्म)जगालॆं सकड धर्मांपशिनॆं पॊरनॆं धर्म आस्स। हॆं द्क्षिण आशियालॆं निज धर्म आनि बहुसंख्येलॆं धर्म। हॆं वेद आधारित धर्म, विंगड-विंगड अनुष्ठान, मत, पद्धतियॊ, संप्रदाय आनि दर्शन ओट्टु करुनु आस्स। विश्वासकांगॆलॆं संख्यॆरि हॆं जगांतुलॆं तिसरॆं व्हॊड धर्म आस्स। यद्यपि हांतुं मस्त देवि-देवतांगॆलि पूजा ज़ात्ता, बद्द म्हणलॆरि हॆं एकीश्वरवादि धर्म आस्स। अनुयायि अनुसार हॆं जगांतुलॆं तिसरॆं व्हॊड धर्म आस्स। हाज्जीं ८२८ अरब अनुयायि भारतांतुं, २३ अरब नॆपाळांतुं, १४ अरब बांग्लादेशांतुं आनि ३.३ अरब बालि, इंडोनेशियांतुं आस्सति।

हिंदु शास्त्रालॆं मस्त वाङ्मय श्रुति अथवा स्मृतिंतुं विंगड कॆल्ललॆं आस्स। हीं वाङ्मय अनुष्ठान, तत्त्ववाद आनि पुराणाविषयारि आस्सति आनि धर्म अनुसार कश्शि जीयचॆं हॆं सांगताति। हांतुं प्राय, महत्त्व आनि अधिकाराविषयारि वेद सकदांतुं व्हॊड आस्सति। उपनिषद्, महाकाव्य रामायण आनि महाभारत अन्य व्हॊड वाङ्मय। महाभारतारि आधारित शास्त्र भागवद् गीता हाका च़ड महत्त्व आसता।

हिंदु धर्म

विशय सुची

उगमबदल

हिंदु हॆं ऊत्र,भारतीय उपमहाद्वीपालॆं वायव्य बदिक व्हांवतलॆं सिंधु न्हयिंथांवुनु आयलां। हिंदु हॆं नांव, मुखारि, अरबि ऊत्र अल्-हिंद, अर्थात् सिंधु न्हयिलॆं पॆलतडियॆरि राबतलीं जन, म्हुणु प्रसिद्ध ज़ाल्लॆं। १३शतक इ. थांयि हिंदुस्तान् (हिंदुवांगॆलि भूमि) हॆं भारताक पर्यायि नांवाधिक नांव मॆळलॆं।

आदलॆं कालांतुं हिंदु भारतीय उपमहाद्वीपारि राबतलॆ, धर्म खंचॆंय आस्सॊ, सकड जनांक आप्पयतलींति। १८ शतक इ.लॆं कडेकालांतुं युरोपीय जनांनि भारतीय धर्मांगॆलॆं अनुसरण करतलॆंक हिंदु म्हुणु आप्पंवचॆक सूरु कॆल्लॆं। माग्गिरि हिंदु धर्मालॆं व्याख्या उदॆयंतिलॆं धर्म (क्रिस्तांव,यहूदि, इस्लाम) नात्तिलॆं आनि वेदांथांवुनु यॆनित्तिलॆं धर्म (बौद्ध, जैन, सीख)हांका सोडुनु भारतीय पाळालॆ जनांगॆलॆ धर्म अश्शि ज़ाल्लॆं।

इतिहासुबदल

आदलॆं भारतीय धर्मालॆं प्रमाण हरप्पा कालांतुं (५५००-२६०० इ.पु) मॆळता। आदिहिंदु धर्म १५००-५०० इ.पु.लॆं अनुष्ठानांक आप्पयताति। आयज़चॆं हिंदु धर्म वेदांथांवुनु आयलॆं (१७००-११००)। वैदिक अनुष्ठानांतुं इंद्र, वरुण, अग्नि अश्शि प्राकृतिक शक्तियांगॆलॆं पूज़ु आनि सोम विधि ज़ात्तलॆं। यज्ञ आनि वैदिक मंत्रोच्चारय ज़ात्तलॆं। ताव्वळि देवस्थान आनि विग्रह नाऽशिलिंति। वैदिक धर्म आनि माज़दायास्ना/ज़रतोष्टि धर्मांतुं आनि कॆलवु भारतीय-युरोपीय धर्मांतुं मस्त समानतॆ आस्स।

इसवि पूर्वालॆं कडेकालांतुं आनि इसविलॆं आदलॆ कालांतुं रामायण आनि महाभारत हिं व्हॊड संस्कृत उपन्यास बरंवुनु आयलीं। कडेरि देवि-देवतांगॆलीं, मनुशांओट्टु मॆळाप आनि दैत्यांओट्टु ज़ूझ़ाविषयारि सांगतलीं, पुराण आयलीं।

तीन व्हॊड प्रवर्तनांनि हिंदु विचाराक नवॆं दीक दाक्कंयलॆं- उपनिषदिक, जैन आनि बौद्ध मान्यतांगॆलॆं सकड भारतांतुं प्रसार। महावीर (जैनांगॆलीं २४. तीर्थंकर) आनि बुद्ध (बौद्ध धर्मालीं संस्थापक) हांनि शिक्कंयलॆं कि मोक्ष मॆळुक वेदांक आनि ज़ाति पद्धतिक स्वीकारचॆं अगत्य ना। बुद्धालॆं मुखारि वच़्च़ुकु हॆंवय सांगलॆं कि आत्मा आनि दॆवालॆं आसचॆं अनावश्यक। २०० इ.न्तुं हिंदु सिद्धांतालॆं (Hindu Philosophy) मस्त दर्शनांतुं (Hindu Schools of Thought) वर्गिकरण ज़ाल्लॆं।

हिंदु सिद्धांतबदल

आस्तिक दर्शनबदल

वेदांक देवोपार्जित आप्पयतलीं सह (६) आस्तिक दर्शन (Orthodox Schools of Thought)

  हीं अस्तिक दर्शन आस्सति।

नास्तिक दर्शनबदल

वेदांक देवोपार्जित आप्पयनात्तिलीं तीन नास्तिक दर्शन (Heterodox Schools of Thought)

  हीं नास्तिक दर्शन आस्सति।

निरीश्वरवादबदल

दॆवारि विश्वास दव्वरनात्तिलॆं दर्शन मस्त फुडलॆथांवुनु हिंदु धर्मांतुं पळंवचॆक मॆळता। हाकाचि निरीश्वरवाद (Atheism) म्हणताति। हाज्जीं दोन वर्ग आस्सति-

गुप्त काळबदल

गुप्त काळा उपरांत संस्कृतालॆं स्थान ऊणॆं ज़ांवुनु प्रकृत मुखारि आयलॆं। वेदांगॆलॆं स्थान गौण ज़ांवुनु पुराण-आधारित, यॆकळॆ प्रमाण म्हुणु धरियेद अश्शि, धर्मालॆं ज़ल्म ज़ाल्लॆं। ब्राह्मण आनि धर्मशास्त्र केंद्रित हिंदु धर्मांतुं परिवर्तन सूरु ज़ाल्लॆं।

इस्लामालॆं काळबदल

७. शतक इ.न्तुं अरब पैणारियांनि सिंध जीकुनु इस्लाम भारतीय उपमहाद्वीपारि हाडलॆं। हॆं कालांतुं बौद्ध धर्मालॆं अधोगति सूरु ज़ाल्लॆं आनि मस्त हिंदु जनांनि इस्लाम स्वीकारलॆं। औरंगज़ेब म्हणकॆ मस्त मुस्लिम राजांनि दॆवस्थानां भॆत्तुनु मुसल्मान नात्तिलांचॆरि अन्याय कॆल्लॆं। यद्यपि राजा अकबर म्हणकॆ कॆलवु राजा सहिष्णु आश्शिलीं। रामानुजाचार्य, माधवाचार्य, चैतन्य महाप्रभु हांगॆलॆं प्रभावानिमित्ति हिंदु धर्मांतुं व्हॊड परिवर्तन आयलॆं। आदि शंकराचार्यानॆं कॆलवु शतकांफुडॆ निर्गुण ब्रह्मणालॆं सूरु कॆल्लॆलॆं अनुष्ठानांक सोडुनु सुलभ पडतलॆं विष्णु अवतारांगॆलॆ हांनि भक्ति संप्रदायालॆ मार्गानॆं अनुष्ठान सूरु कॆल्लॆं।


ईश्वरबदल

हिंदु धर्मांतुं ईश्वरालीं विंगडविंगड सिद्धांत आस्सति; एकीश्वरवाद (monotheism), बहुईश्वरवाद (polytheism), सांख्य (panentheism),अद्वैत (pantheism), योग (monism) आनि निरीश्वरवाद (atheism)। जन तात्तांगॆलॆ दर्शना अनुसार अनुष्ठान करताति।

मस्त हिंदु जन आत्मा, आपणांलॆं बद्द स्वरूप, हाका शाश्वत लॆकताति। अद्वैत वेदांत दर्शना अनुसार हॊ आत्मा ईश्वरा थांवुनु विंगड ना। अद्वैत म्हणता कि मनुशज़ल्मालॆं ध्येय, आपणांलॊ आत्मा ईश्वर ज़ंव आस्स, हॆं कळचॆं आस्स। यद्यपि, उपनिषद् म्हणताति कि आपणांक आत्मालॆं ज़ाणवाय ज़ाल्लॆं, आनि ब्रह्मा ओट्टु संबंध कळलॆरि आपण मोक्ष पांवता।

द्वैत दर्शन आनिसार ब्रह्म विंगड व्यक्तिमत्त्व आस्स आनि द्वैत अनुयायि ताका संप्रदाया अनुसार ब्रह्म, विष्णु, शिव अथवा शक्ति म्हुणु पूज़ताति।

आश्रमधर्मबदल

प्रतियॆकळालॆं जीवितालीं चार बिंदु आस्सति।

  • ब्रह्मचर्याश्रम्- हॆं चार वरस धक्कुनु अटरा वरसांथांय आसता। हांतुं मनुशानॆं मात्र शिकका आनि ताज्जॆंखात्तिरि ब्रह्मचर्य पाळका। हॆं चॆरुडुपणा धक्कुनु तरणायालॆं सुरुवे थांय आसता।
  • गृहस्ताश्रम्- हॆं तरणायालॆं मध्यकाळांतुं, बहुश: प्राय २५-३०थांय, यॆत्ता। हांतुं ऎकळानॆं वरडिक कॊरियेद आनि चॆरुडुवांक ज़ल्म दिंवयेद।
  • वनप्रस्थाश्रम्- हॆं काळ ६५-७० उपरांत सूरु ज़ात्ता। हांतुं ऎकळानॆं संतुष्ट ज़ांवका आनि त्याग करुक शिकका।
  • संन्यासाश्रम् - हांतुं मनुशानॆं संपूर्ण त्याग करुनु देवकार्यांतुं लागका।

चतुर्वर्णाश्रमबदल

हाका आयज़चॆं पर्यायि ऊत्र ज़ाति आस्स। बद्द म्हणलॆरि चतुर्वर्णाश्रम हॆं चतुर् अर्थात् चार आनि वर्ण अर्थांत् बण्ण हॆ ऊत्रांथांवुनु यॆत्ता।

हीं चार वर्ण आस्सति।

वेदकालांतुं हीं वर्ण प्रतियॆकळॆ मनुशालीं चार गुणधर्म अश्शि लॆकतलींति। ऋग्वेदांतुं बरंयलां- जन्मना जायते क्षुद्र: संस्कारात् द्विज उच्यते। विद्यया याति विप्रत्वाम् ब्रह्म जानाति इति ब्राह्मण:।।

ज़ल्मा वॆळारि प्रतियॆलॊ क्षुद्र (शून्य) आसता। संस्कारांनिमित्ति ताका दुसरॆं ज़ल्म मॆळता (द्विज)। विद्येनॆं तॊ बुधवंत ज़ात्ता। हांनॆं ताका ब्रह्म कळता आनि तॊ ब्राह्मण (ब्रह्म कॊणांक कळता) ज़ात्ता। आयजि हीं ऊत्र ज़ातिवाचक ज़ाल्लांति।

सॊळा संस्कारबदल

संस्कार जीवनांतुलॆ महत्त्वालॆं बिंदुवांगॆलीं प्रतीक आस्सति आनि म्हुणु तांगॆलॆं आचरण करका। प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष हांतुं पितरांगॆलॆं, म्हालगडांगॆलॆं आनि मॊगाचांगॆलॆं उल्लेख अथवा सहभाग ज़ात्ता। हीं आस्सति-

  • प्रसव संस्कार
    • गर्भदान - दारलानॆं आनि बायलेनॆं चॆरुडुवा खात्तिरि ओट्टु यॆंवचॆं।
    • फुल्ला मळप - गर्भालीं लक्षण दिसलॆरि पुंसवन आनि सीमांतोनयन ज़ात्ता। हॆं प्रसवालॆं पांच़वॆं, सातवॆं, नववॆं मासांतुं करताति।
  • चॆरुडुपण संस्कार
    • बारसॊ ज़ल्मा उपरांतलॆं काळाक सॊयर (जनन अशौच) म्हणताति आनि हॆं इकरा दीस आसता। इकरवॆं दीसारि आवुसु, चॆरुडु आनि कुटमालॆं शुद्धि खात्तिरि गृह शांति करताति। पंचगाव्य प्राशना उपरांति सॊयर मुग्दशिता। चॆरुडुवालॊ बारसॊ ज़ात्ता। फुडॆ ज़ल्मा उपरांत सहवॆं दीसारि सत्ति (षष्ठी) पूज़ु करतलींति। आयज़चॆं काळारि हॆं मस्त ऊणॆं ज़ाल्लां।
    • दांतॊळियॊ हाका संस्कृतांतुं अन्नप्राशन म्हणताति। च़ल्लियांखात्तिरि हॆं आटवॆं, धावॆं, बारावॆं (ओज़) मासांतुं आनि च़ल्लियॆंखात्तिरि पांच़वॆं, सातवॆं, नववॆं (सम) मासांतुं ज़ात्ता।
    • ज़ावळ काडचॆं च़ल्लियांगॆलॆं पयलॆं आयलॆलॆं कॆंस पयलॆं, दुसरॆं वरसांतुं काडताति।
    • कान तॊपचॆं चॆरुडुवालॆं कान १२वॆं अथवा १६वॆं दीसारि, ६वॆं, ७वॆं अथवा ८वॆं मासारि ना ज़ल्लॆरि १लॆं,३रॆं,५वॆं,७वॆं,९वॆं वरसारि तॊपताति। च़ल्लियांगॆलॆं उज्जॆ कान आनि च़ल्लियॆंगॆलॆं दावॆं कान तॊपताति।


  • विद्या संस्कार
    • मूंजि आट्ट वरसारि आचार्य चॆरुडुवाक जनुवॆ धारण करुक लांयता। मूंजि द्वारा चॆरुडुवालॆं दुसरॆं ज़ल्म ज़ात्ता (द्विज)।
    • सोडमूंजि समावर्तन संस्कार ब्रह्मचर्यालॆं कडेकालांतुं ज़ात्ता।
  • वरडिक
  • मरण संस्कार

 

"https://gom.wikipedia.org/w/index.php?title=हिंदू_धर्म&oldid=127861" चे कडल्यान परतून मेळयलें